Recent Posts

  • MAY 2026
  • APRIL 2026
  • MARCH 2026
  • FBRUARY 2026
  • JANUARY 2026

Recent Comments

No comments to show.
utsukta

आधुनिकता की तार्किक क्षमता से ध्यानी वर्चस्व का पदार्थ शूल टंकारी समन्वय धारित करने वाला जीव प्राणी अवसरवाद की वंदनीय वेदना को भी परिश्रम का भाव कहता रहा। जिस आधार की निर्गंधीयता ने स्वपात्र की मूलता को एहसास कृत किया, उसमें भी प्रदूषित ऊष्मा का घनत्व ही गंधीय मात्रा को भार युक्त करता रहा। अपितु प्रकृति की निश्चिंत्यता ही निश्चयवाद को मिटा देती है, प्रकाश बना तो सारथी अपितु मूल आधार में किस ऊर्जा की छाया या परछाई से प्रकाश भी गतिमान है, उसे कोई ज्ञात नहीं कर पाया, सबको यही वरीयता भाव - गुण समानुपात लगी, की, आने वाला केंद्र ही गुरुत्व की भूमि का दर्पण त्रिकाल समर्पण है।

Quick Links
  • Home
  • About Us
  • Contact Us
  • Services
संपर्क करें
सूर्या आश्रम, मानव नगर, कल्याणपुर, लखनऊ, उत्तर प्रदेश– 226022
8423330911, 9598911575
editor.prakritimail@gmail.com
© 2023 utsukta | PopularFX Theme